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ताड़-खजूर पत्तों की कटाई के साथ चाकुलिया में मकर संक्रांति की तैयारियों ने पकड़ी रफ्तार

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चाकुलिया | संवाददाता (रोहन सिंह) :
जैसे-जैसे ठंड का असर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे झारखंड के महान पर्व मकर संक्रांति (टुसू पर्व) की आहट भी चाकुलिया क्षेत्र में सुनाई देने लगी है। ग्रामीण इलाकों में ताड़ और खजूर के पत्तों की कटाई शुरू होते ही यह साफ संकेत मिल गया है कि पर्व की तैयारियां अब पूरे जोर पर हैं।

सुबह-सुबह गांवों के आसपास के खेतों, बागों और सड़कों के किनारे ग्रामीण ताड़ और खजूर के पेड़ों की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं। हाथों में हंसिया और चेहरे पर उत्साह लिए ग्रामीण पत्तों की कटाई में जुटे हैं, जिससे गांवों में पर्व से पहले की हलचल दिखाई देने लगी है।

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इन तैयारियों में केवल बड़े ही नहीं, बल्कि स्कूली बच्चे भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। कहीं बच्चे खजूर के पत्ते काटते दिख रहे हैं तो कहीं उन्हें बैलगाड़ी पर लादकर गांव की ओर ले जाते हुए नजर आ रहे हैं। कटे हुए पत्तों को खुले मैदानों में धूप में सुखाया जा रहा है, ताकि मकर संक्रांति से पहले इन्हीं पत्तों से कूमा बनाए जा सकें।

जमुआ पंचायत अंतर्गत माचाडीहा गांव के पास यह दृश्य साफ देखने को मिला, जहां बच्चे खजूर के पत्तों की कटाई कर उन्हें बैलगाड़ी पर लादते नजर आए। यह दृश्य न सिर्फ पर्व की तैयारी को दर्शाता है, बल्कि गांवों में मकर संक्रांति को लेकर उत्साह और उमंग को भी उजागर करता है।

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मकर संक्रांति से पहले गांवों में तालाबों, नदियों और अन्य जल स्रोतों के किनारे कूमा बनाने की परंपरा निभाई जाती है। ग्रामीण छोटे-छोटे कूमा भी बनाते हैं, जबकि कई स्थानों पर 20 फीट से लेकर 100 फीट तक ऊंचे कूमा तैयार किए जाते हैं, जो इस पर्व की पहचान बन चुके हैं।

मकर संक्रांति के दिन सुबह स्नान के बाद इन्हीं सूखे पत्तों से बने कूमों को जलाया जाता है। ग्रामीण आग तापते हुए अपने घरों की ओर लौटते हैं। इसी परंपरा को निभाने के लिए पर्व से कई दिन पहले ही ताड़ और खजूर के पत्तों की कटाई और कूमा निर्माण का कार्य शुरू कर दिया जाता है।

वर्ष 2026 में मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा। इससे पहले चाकुलिया क्षेत्र के गांवों में ताड़ और खजूर के पत्तों से कूमा बनकर तैयार हो जाएंगे और पूरे इलाके में पर्व का माहौल बन जाएगा।