संवाददाता | चाकुलिया
चाकुलिया प्रखंड में विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुकी आदिम जनजाति सबर के उत्थान को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है। जनजातीय कार्य मंत्रालय के निर्देश पर सोमवार से गांव-गांव में विस्तृत सर्वे अभियान शुरू किया गया।
66 छात्राओं की टीम कर रही सर्वे
इस सर्वे में जमशेदपुर विमेंस कॉलेज की इतिहास एवं राजनीति विज्ञान विभाग की 66 छात्राएं शामिल हैं।
टीम लीडर अभिषेक झा ने बताया कि सर्वे के लिए कुल 11 टीमों का गठन किया गया है, जिसमें प्रत्येक टीम में 6-6 छात्राएं हैं।
खास बात यह है कि ये सभी छात्राएं पहले भी आदिम जनजातियों पर सर्वे कर चुकी हैं, इसलिए अनुभव और विशेषज्ञता के आधार पर इन्हें दोबारा चुना गया है।
क्या-क्या जांचा जा रहा है?
इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि सरकार की योजनाएं जमीन पर कितनी प्रभावी हैं। इसके तहत टीम निम्न बिंदुओं पर डेटा जुटा रही है:
- राशन, पेंशन की उपलब्धता
- आवास योजना का लाभ
- बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं
- सरकारी योजनाओं की वास्तविक पहुंच
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सर्वे के दौरान टीम घर-घर जाकर मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए डेटा एकत्र कर रही है, जिससे रिपोर्ट अधिक सटीक और डिजिटल रूप में तैयार होगी।
क्लस्टर मॉडल पर फोकस
सर्वे के साथ-साथ यह भी देखा जा रहा है कि आदिम जनजाति के लोगों के लिए प्राकृतिक वातावरण में आवास विकसित किया जाए।
इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा:
- बजट में वृद्धि की गई है
- अलग-अलग क्लस्टर बनाए जा रहे हैं
- एक क्लस्टर में करीब 50 घर होंगे, जहां केवल आदिम जनजाति के लोग रहेंगे
जिले में शुरू हुआ काम
पूर्वी सिंहभूम जिले में इस योजना के तहत काम शुरू हो चुका है। प्रशासन और सर्वे टीम की कोशिश है कि इस पहल से सबर जनजाति के जीवन स्तर में वास्तविक सुधार लाया जा सके।
उम्मीद: योजनाओं का मिलेगा सही लाभ
इस सर्वे से यह स्पष्ट हो सकेगा कि सरकारी योजनाएं कहां तक पहुंची हैं और किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है।
उम्मीद है कि इसके आधार पर आगे की नीतियां और योजनाएं और अधिक प्रभावी ढंग से लागू की जाएंगी।