झारखंड की नदियों पर माफियाओं का कब्जा
बहरागोड़ा /अबुआ खबर : झारखंड में अवैध बालू खनन अब संगठित अपराध का रूप ले चुका है और बहरागोड़ा इसका सबसे बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है। स्वर्णरेखा नदी के कई घाटों पर बालू माफियाओं ने खुला कब्जा जमा लिया है, जहां कानून और प्रशासन बेबस नजर आ रहा है।

दिन में खुलेआम लूट, रात में हाईवा का आतंक
दिनदहाड़े नदी से बालू निकालना और रात के अंधेरे में हाईवा व भारी ट्रकों से अवैध परिवहन—यह सब अब बहरागोड़ा में आम दृश्य बन चुका है। माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें किसी कार्रवाई का भय नहीं दिखता।

झारखंड सरकार को करोड़ों का नुकसान
बालू माफियाओं की इस लूट से झारखंड सरकार को भारी राजस्व क्षति हो रही है। राज्य के खजाने पर सीधा डाका डाला जा रहा है, जबकि आम जनता विकास के लिए तरस रही है। यह स्थिति पूरे झारखंड के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है।
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छापेमारी से पहले मिल जाती है ‘सूचना’
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जैसे ही खनन विभाग या प्रशासन की कार्रवाई की भनक लगती है, माफियाओं को पहले ही सूचना मिल जाती है। कुछ दिनों तक खनन रोक दिया जाता है और फिर हालात सामान्य होते ही अवैध धंधा दोबारा शुरू हो जाता है।
स्थानीय युवाओं को बनाया जा रहा मोहरा
बालू माफिया स्थानीय युवाओं को लालच देकर अपने नेटवर्क में शामिल कर रहे हैं। इससे न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर खतरा बढ़ रहा है, बल्कि पूरे क्षेत्र का सामाजिक ताना-बाना भी बिगड़ता जा रहा है।
पर्यावरण और शिक्षा दोनों पर प्रहार
स्वर्णरेखा नदी से लगातार हो रहे अवैध उत्खनन से पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है। वहीं भारी वाहनों के शोर और धूल से गांवों के बीच स्थित विद्यालयों में बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
पूरे झारखंड के लिए चेतावनी
बहरागोड़ा में पनप रहा बालू माफिया तंत्र यह साफ संकेत देता है कि अगर अब भी सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो झारखंड की अन्य नदियां और इलाके भी माफियाओं की गिरफ्त में आ जाएंगे।

सरकार और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने झारखंड सरकार से मांग की है कि बालू माफियाओं के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाए, दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो और राज्य की नदियों व प्राकृतिक संसाधनों को माफियाओं से मुक्त कराया जाए।