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दिशोम गुरु शिबू सोरेन को भारत रत्न मिलने की राह हुई और आसान: प्रस्ताव प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजा गया, अंतिम निर्णय अब प्रधानमंत्री पर

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रांची। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और आदिवासी नेता दिशोम गुरु शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की प्रक्रिया अब निर्णायक चरण में पहुँच गई है। राज्य सरकार द्वारा पारित सर्वसम्मत प्रस्ताव गृह मंत्रालय के माध्यम से प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को भेज दिया गया है। अब इस विषय में अंतिम निर्णय पूरी तरह प्रधानमंत्री द्वारा किया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, कुल सात प्रस्ताव वर्तमान में भारत रत्न के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय को उपलब्ध हैं। इनमें शिबू सोरेन का नाम प्रमुखता से शामिल है। राजनीतिक और सामाजिक समर्थन के कारण यह संभावना बढ़ गई है कि प्रधानमंत्री इस निर्णय में झारखंड और आदिवासी समुदाय की भावनाओं को ध्यान में रख सकते हैं।

राजनीतिक और सामाजिक समर्थन

झारखंड के विभिन्न दलों ने शिबू सोरेन को भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग को लेकर एकजुटता दिखाई है।

झामुमो नेताओं का कहना है कि गुरुजी ने झारखंड के निर्माण और आदिवासी अधिकारों के लिए अनगिनत संघर्ष किए।

भाजपा और कांग्रेस के नेताओं ने भी उनके योगदान की सराहना की और कहा कि उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलनी चाहिए।

आदिवासी संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे आदिवासी पहचान और अधिकारों का सम्मान बताया।

गुरुजी का योगदान

शिबू सोरेन ने अपने जीवनकाल में आदिवासी समाज के उत्थान, झारखंड आंदोलन और राज्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे कई बार जेल गए, संसद में आदिवासी अधिकारों की आवाज़ उठाई और राज्य एवं केंद्र स्तर की राजनीति में सक्रिय रहे।

अब क्या होगा अगला कदम?

प्रधानमंत्री कार्यालय में प्रस्ताव की समीक्षा के बाद अंतिम निर्णय किया जाएगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि राजनीतिक और सामाजिक समर्थन जारी रहा, तो शिबू सोरेन को भारत रत्न मिलने की संभावना बहुत मजबूत है।