रांची: झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के 13वें राष्ट्रीय अधिवेशन के बाद पार्टी ने अपनी नई केंद्रीय कार्यकारिणी समिति की घोषणा कर दी है। इस अधिवेशन में हेमंत सोरेन को पार्टी का नया अध्यक्ष चुना गया, जबकि पार्टी के संस्थापक और वरिष्ठ नेता शिबू सोरेन को संस्थापक संरक्षक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह अधिवेशन झारखंड की राजनीति में बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे आने वाले दिनों में पार्टी की रणनीति और संगठन की मजबूती का खाका तैयार होगा।
घोषित कार्यकारिणी में नलिन सोरेन, स्टीफन मरांडी, रूपी सोरेन समेत कुल आठ नेताओं को उपाध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा महासचिव, सचिव और कोषाध्यक्ष जैसे अहम पदों पर भी पार्टी ने अनुभवी और युवा नेताओं का संतुलन बनाकर नियुक्तियां की हैं, जिससे संगठन को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
पार्टी की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि यह टीम आने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में झामुमो की ताकत बढ़ाने के लिए काम करेगी। नई कार्यकारिणी में विभिन्न वर्गों, समुदायों और क्षेत्रों के नेताओं को जगह दी गई है, ताकि झारखंड के अलग-अलग हिस्सों में पार्टी की पकड़ मजबूत की जा सके।
झामुमो कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच इस घोषणा के बाद उत्साह का माहौल है। हेमंत सोरेन के अध्यक्ष बनने को पार्टी में युवा नेतृत्व के उभार के रूप में देखा जा रहा है, जबकि शिबू सोरेन का मार्गदर्शन संगठन के लिए एक मजबूत स्तंभ बना रहेगा।
हेमंत सोरेन ने अध्यक्ष पद संभालने के बाद अपने संबोधन में कहा कि पार्टी आदिवासी, मूलवासी, किसान, मजदूर और गरीबों के हक की लड़ाई को और मजबूती से लड़ेगी। उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलन की भावना को जीवित रखते हुए सामाजिक न्याय, विकास और समानता के मुद्दों पर पार्टी आगे बढ़ेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नई टीम झामुमो के लिए आगामी चुनौतियों से निपटने में मददगार साबित होगी। पार्टी का फोकस अब संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने, युवाओं को जोड़ने और सरकार की नीतियों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने पर रहेगा।
झामुमो का यह राष्ट्रीय अधिवेशन राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जहां पार्टी नेतृत्व में बदलाव के साथ भविष्य की दिशा तय कर रही है। आने वाले दिनों में पार्टी की रणनीति और उसके प्रभाव पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।



