पटना/नई दिल्ली। बिहार की मतदाता सूची से 56 लाख से अधिक वोटरों के नाम हटाए जाने के बाद सियासी भूचाल आ गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की नेता और सांसद महुआ मोइत्रा ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला बताया है। उन्होंने केंद्र सरकार को आड़े हाथ लेते हुए सवाल उठाया कि अगर इतने बड़े स्तर पर “अवैध घुसपैठिए” मतदाता सूची में थे, तो गृह मंत्री अमित शाह को जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए।
चुनाव आयोग की विशेष समीक्षा पर विवाद
चुनाव आयोग द्वारा बिहार में Special Summary Revision के तहत वोटर लिस्ट की समीक्षा की गई। इस दौरान 56 लाख से अधिक नाम या तो मृत, डुप्लिकेट, स्थानांतरित या ग़ैर-पात्र बताकर हटाए गए। EC का कहना है कि यह कदम मतदाता सूची को अद्यतित और पारदर्शी बनाने के लिए उठाया गया है।
महुआ मोइत्रा ने उठाए गंभीर सवाल
महुआ मोइत्रा ने चुनाव आयोग की इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताया। उन्होंने कहा कि,
“अगर इन लाखों लोगों को ‘अवैध घुसपैठिया’ कहा जा रहा है, तो गृह मंत्रालय की विफलता साफ है। ऐसे में गृहमंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए।”
उन्होंने आरोप लगाया कि यह कवायद प्रवासियों, अल्पसंख्यकों और गरीब तबके के लोगों को मतदान से दूर करने की साज़िश हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की याचिका
महुआ मोइत्रा ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में उन्होंने चुनाव आयोग की प्रक्रिया को संविधान और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम का उल्लंघन बताते हुए इस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
विपक्ष ने भी जताई चिंता
इस मुद्दे पर अन्य विपक्षी दल भी सक्रिय हो गए हैं। राजद (RJD) ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि यह एक सुनियोजित रणनीति है जिससे चुनावी समीकरण प्रभावित किए जा सकें।
चुनाव आयोग की सफाई
चुनाव आयोग ने कहा है कि यह सामान्य प्रक्रिया है और इसमें किसी वर्ग विशेष को लक्षित नहीं किया गया है। आयोग ने यह भी बताया कि 1 अगस्त से 1 सितंबर के बीच दावे व आपत्तियां दर्ज कराने का मौका दिया जाएगा और 30 सितंबर को अंतिम सूची प्रकाशित की जाएगी। Make slug