Responsive Menu
Add more content here...

झारखंड में पारंपरिक स्वशासन को सशक्त करने की पहल, शिक्षा मंत्री से मिला माझी परगना महाल का प्रतिनिधिमंडल

Spread the love

संवाददाता (निलेश बेरा):

बहरागोड़ा के माझी परगना महाल प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को झारखंड के शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन से रांची में मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने ग्रामीण क्षेत्रों में लागू पारंपरिक माझी-परगना शासन व्यवस्था को संरक्षित और वैधानिक दर्जा देने की मांग की।

इस भेंटवार्ता का नेतृत्व पाराणीक शास्त्री हेंब्रम ने किया, जिसमें क्षेत्र के कई पारंपरिक ग्राम प्रधान, माझी बाबा और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल रहे। बैठक में ग्रामीण स्तर पर निर्णय लेने की परंपरागत प्रणाली को सरकारी मान्यता देने की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की गई।

आदिवासी स्वशासन को सशक्त करने की मांग

प्रतिनिधियों ने मंत्री को बताया कि आदिवासी समाज की ‘माझी-परगना प्रणाली’ वर्षों से गांवों में सामाजिक न्याय, अनुशासन और एकजुटता का प्रतीक रही है। लेकिन प्रशासनिक व्यवस्था के विस्तार और सामाजिक बदलाव के कारण यह परंपरा कमजोर होती जा रही है। इसलिए इसे संवैधानिक और कानूनी संरक्षण की आवश्यकता है।

शिक्षा मंत्री ने जताया समर्थन

शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन ने प्रतिनिधियों की बात को गंभीरता से सुना और भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार पारंपरिक स्वशासन प्रणाली को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी कदम उठाएगी। उन्होंने कहा, “यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर है, जिसे सहेजना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।”

प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रमुख लोग

प्रतिनिधिमंडल में बनघाघरा तरप पारगना कुंवर लाल मांडी, बहरागोड़ा तरप पारगना शुशील मुर्मू, समाजसेवी ललित मांडी, सुरेंद्र हांसदा, बाघराय किस्कु, मनमोहन बेसरा, गोमहा मुर्मू समेत कई ग्राम प्रधान और माझी बाबा शामिल रहे। सभी ने सामूहिक रूप से पारंपरिक प्रणाली को संस्थागत समर्थन देने की मांग की।

परंपरा, न्याय और पर्यावरण संरक्षण की आधारशिला

प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि माझी-परगना प्रणाली सिर्फ एक शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक न्याय और सांस्कृतिक पहचान को भी संजोती है।

नीति निर्माण की मांग

प्रतिनिधिमंडल ने आग्रह किया कि झारखंड सरकार को इस दिशा में ठोस नीति बनानी चाहिए ताकि यह व्यवस्था आगे की पीढ़ियों तक प्रभावी रूप से पहुंच सके और बाहरी हस्तक्षेप से बची रहे।