बहरागोड़ा: प्रखंड के बेनाशोली काजू जंगल में पिछले करीब एक सप्ताह से 9 से 10 जंगली हाथियों का झुंड लगातार मौजूद है। हाथियों की बढ़ती गतिविधियों ने लुगाहरा, लोधनबनी, पानीशोल, धड़ांरी, भादुआ, दुधकुंडी समेत आसपास के कई गांवों के लोगों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीण लगातार भय के साये में जीवन बिताने को मजबूर हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, शाम ढलते ही हाथियों का झुंड जंगल से निकलकर आसपास के इलाकों की ओर बढ़ने लगता है। इस दौरान वे बांस की झाड़ियों और अन्य वनस्पतियों को नुकसान पहुंचाते हुए गांवों के करीब पहुंच जाते हैं। हाथियों की लगातार आवाजाही के कारण ग्रामीण पूरी रात सतर्क रहते हैं और किसी भी अनहोनी की आशंका बनी रहती है।
हाथियों की मौजूदगी का असर जगन्नाथपुर–दारिशोल मुख्य मार्ग पर भी देखने को मिल रहा है। इसी रास्ते से प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं ज्ञानदीप इंग्लिश स्कूल, जयपुरा तथा अन्य शिक्षण संस्थानों तक पहुंचते हैं। अभिभावकों का कहना है कि हाथियों की गतिविधियों के चलते बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। वहीं सुबह-शाम इस मार्ग से गुजरने वाले किसान, राहगीर और दोपहिया वाहन चालक भी जोखिम महसूस कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के गांवों के समीप मंडराने से खेतों और बागानों में जाना भी मुश्किल हो गया है। कई परिवार सूर्यास्त के बाद घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं। लोगों को आशंका है कि यदि हाथियों का झुंड आबादी वाले क्षेत्र में प्रवेश कर गया तो जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता है।
ग्रामीणों ने वन विभाग पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि स्थिति गंभीर होने के बावजूद प्रभावित क्षेत्रों में नियमित निगरानी, गश्ती दल की तैनाती और हाथियों को सुरक्षित रूप से घने जंगल की ओर ले जाने के लिए अब तक प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं।
ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि प्रभावित गांवों में तत्काल रेस्क्यू एवं निगरानी टीम तैनात की जाए, हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाए और माइकिंग के माध्यम से लोगों को सतर्क किया जाए। साथ ही जगन्नाथपुर–दारिशोल मार्ग पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए हाथियों को सुरक्षित रूप से आबादी वाले क्षेत्रों से दूर जंगल की ओर भेजने की भी मांग की गई है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।