बहरागोड़ा, संवाददाता बापुन —
नेताजी सुभाष शिशु उद्यान, बहरागोड़ा में सारना समिति के तत्वावधान में विश्व आदिवासी दिवस बड़े ही हर्षोल्लास और गरिमा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर आदिवासी समाज के बड़ी संख्या में महिला-पुरुषों ने भाग लिया और अपनी संस्कृति व विरासत के संरक्षण का संकल्प लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत सारना झंडोत्तोलन के साथ हुई, जिसके बाद सभी वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। मंच का संचालन समिति के अध्यक्ष कृष्ण मुंडा ने किया। कार्यक्रम के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
समिति के संरक्षक प्रोफेसर श्याम मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा, “आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत हमारी अस्मिता है, जिसे संरक्षित रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। आज भी हमारा समाज कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रहा है – जमीन से बेदखली, अधिकारों का हनन, और सामाजिक उपेक्षा जैसी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। ऐसे में हमें एकजुट होकर अपने हक की लड़ाई लड़नी होगी।”
समिति के अध्यक्ष कृष्ण मुंडा ने कहा, “आदिवासी समाज इस देश का मूल निवासी है, जिसने हमेशा जंगल और प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर जीवन जिया है। आज का दिन उन वीर शहीदों को नमन करने का दिन है, जिन्होंने हमारे अधिकारों के लिए संघर्ष किया। हमें उनके पदचिन्हों पर चलकर अपने अधिकारों की रक्षा करनी होगी।”
इस कार्यक्रम में ललित मंडी, नलिनी मुंडा, पारस मनी मुंडा, ऊषा रानी मुंडा, उत्तम मुंडा, ग्राम प्रधान नंद लाल सोरेन, शोभा राम हेंब्रम, गुरु चरण सिंह, साधु राम सिंह समेत समाज के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
इस अवसर पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुईं, जिनमें पारंपरिक नृत्य और गीतों के माध्यम से आदिवासी जीवन की झलक प्रस्तुत की गई। आयोजन के अंत में सभी ने एकजुटता के साथ समाज की बेहतरी के लिए काम करने का संकल्प लिया।