रांची। झारखंड की राजधानी रांची में मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की रांची महानगर इकाई ने सरकारी योजनाओं की विफलताओं, भ्रष्टाचार और जनसुरक्षा के मुद्दों को लेकर जोरदार आक्रोश प्रदर्शन किया। यह विरोध प्रदर्शन शहर के अंचल कार्यालय के समक्ष आयोजित किया गया, जिसमें विधायक सी.पी. सिंह सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं—महिला और पुरुष दोनों—ने भाग लिया।
प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी की और सरकारी कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद की। इसके साथ ही अंचल कार्यालय के बाहर धरना भी दिया गया।
विधायक सी.पी. सिंह ने खोला मोर्चा
धरना स्थल पर संबोधित करते हुए विधायक सी.पी. सिंह ने कहा,
“सरकारी कार्यालयों में जनता को घूसखोरी और भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी कार्य पारदर्शिता से और समय पर होने चाहिए।”
उन्होंने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आम जनता को योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा और प्रशासन जनता की नहीं, दलालों की सेवा में लगा है।

कांग्रेस और झामुमो ने किया पलटवार
भाजपा के इस प्रदर्शन पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और कांग्रेस की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।
झामुमो प्रवक्ता मनोज पांडेय ने भाजपा के आंदोलन को नाकाम करार देते हुए कहा:

“रांची की जनता को फ्लाईओवर, मैया सम्मान योजना सहित कई लाभकारी योजनाएं दी जा रही हैं, लेकिन भाजपा को यह रास नहीं आ रहा। महज 2-4 कार्यकर्ता इकट्ठा कर भाजपा जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही है।”
उन्होंने भाजपा शासित राज्यों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े करते हुए कहा कि “अपने गिरेबान में झांकने की जरूरत है।”
कांग्रेस प्रदेश मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने और भी तीखा हमला बोलते हुए कहा:

“भ्रष्टाचारियों को पनाह देने वाला कोई है, तो वो देश के प्रधानमंत्री हैं। भाजपा खुद भ्रष्टाचार में लिप्त है। लोकसभा चुनाव की हार इसी घमंड का नतीजा थी और जनता ने जवाब दे दिया।”
उन्होंने भाजपा को “नकार दी गई पार्टी” करार दिया और इसे एक राजनीतिक नौटंकी बताया।
आरोप-प्रत्यारोप की गर्मी तेज
राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप की जंग और तेज हो गई है। जहां भाजपा खुद को जनता के पक्ष में बताने की कोशिश कर रही है, वहीं कांग्रेस और झामुमो इसे विपक्ष की हताशा बता रहे हैं।
अब देखना यह होगा कि इस सियासी घमासान में असल मुद्दों का समाधान होता है या नहीं, और जनता को इस आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति से क्या वास्तविक लाभ मिल पाता है।