चाकुलिया | संवाददाता (रोहन सिंह)
चाकुलिया में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती इस बार विशेष उत्साह, गरिमा और सांस्कृतिक जोश के साथ मनाई गई। शनिवार को आदिम मुंडा महाल विकास समिति द्वारा एक भव्य पदयात्रा निकाली गई, जिसने पूरे क्षेत्र का माहौल उत्सवमय कर दिया। यात्रा में शामिल सैकड़ों पुरुषों और महिलाओं ने पारंपरिक वाद्य-यंत्रों की थाप पर जय-जयकार करते हुए महानायक बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि दी।
गोविंदपुर देशुआ जाहेर गाड़ से हुई शुरुआत
सुबह वार्ड नंबर 1 स्थित गोविंदपुर देशुआ जाहेर गाड़ में समिति सदस्यों और ग्रामीणों ने बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। पारंपरिक पहिरन में सजे युवा, महिलाएँ और बुजुर्गों ने भगवान बिरसा के आदर्शों और आंदोलन को याद करते हुए पदयात्रा की शुरुआत की।

मुख्य सड़कों से गुजरती हुई शानदार पदयात्रा
ढोल, माग, ताशा और पारंपरिक नगाड़ों की गूंज से पूरा इलाका जाग उठा। पदयात्रा कमारीगोड़ा से होते हुए बिरसा मुंडा चौक पहुँची, जहाँ दोबारा प्रतिमा पर माल्यार्पण कर समाज के लोगों ने अपने英雄 को नमन किया।
मुख्य बाजार पथ से गुजरती यह यात्रा देखते ही देखते जनजलधि में बदल गई। महिलाएं हाथों में समृद्ध सांस्कृतिक प्रतीक लिए चल रही थीं, जबकि युवा पारंपरिक धुनों पर झूमते आगे बढ़ रहे थे।

प्रखंड कार्यालय में समापन, एकता का अद्भुत प्रदर्शन
अंत में पदयात्रा प्रखंड कार्यालय परिसर पहुँची, जहाँ भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर अंतिम बार श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। समिति द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम आदिवासी समाज की एकजुटता, सांस्कृतिक शक्ति और समुदाय की जीवंतता का अनूठा उदाहरण रहा।
इन गणमान्यों की रही प्रमुख उपस्थिति
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित थे—
मुखिया मोहन सोरेन, चुनाराम मुंडा, कुशराम सिंह मुंडा, पिंटू सिंह मुंडा, निमाई मुंडा, शंकर मुंडा, अशोक मुंडा, भागीरथ सिंह मुंडा, मंटू मुंडा, इंद्रजीत मुंडा, दुर्गा पद सिंह मुंडा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण।
सभी प्रतिभागियों ने एक स्वर में कहा कि बिरसा मुंडा जयंती न सिर्फ एक पर्व है, बल्कि यह हमारी पहचान, संघर्ष और संस्कृति की गौरवगाथा का प्रतीक है।