चाकुलिया संवाददाता (रोहन सिंह) : आदिम जनजाति सबरों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं और अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। पंचायतवार शिविर आयोजित कर उनके विकास की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन इन सबके बीच आपूर्ति विभाग की लापरवाही के कारण अंत्योदय कार्डधारी सबरों को डाकिया योजना के तहत सड़े-कीड़े लगे चावल की आपूर्ति हो रही है, जिससे समुदाय में भारी आक्रोश व्याप्त है।
चाकुलिया नगर पंचायत कार्यालय और प्रखंड कार्यालय के पास रहने वाले सबर परिवारों को मिली चावल की बोरियों में चावल ढेले बन चुके हैं और उनमें कीड़े लग गए हैं। इस चावल से बदबू आ रही है और यह खाने के लिए बिलकुल अनुपयुक्त बताया जा रहा है। सबरों ने कहा कि यह चावल तो जानवर भी खाना पसंद नहीं करेंगे।

अंत्योदय कार्डधारकों को डाकिया योजना के तहत प्रति माह 35 किलो चावल मुफ्त वितरित किया जाता है। लेकिन इस बार वितरित किया गया चावल गुणवत्ता में इतना खराब है कि कई परिवार इसे खाने से इंकार कर रहे हैं। जयसिन सबर, विजय सबर, सुनील सबर, सरजू सबर, गीता सबर, जानवी सबर सहित कई सबर परिवारों ने अपनी नाराजगी जताई और मांग की कि विभाग के अधिकारी इस चावल को खुद खाकर दिखाएं।
इस संबंध में प्रभारी प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी राकेश कुमार सिंह ने बताया कि चावल धालभूमगढ़ स्थित एसएफसी गोदाम से बोरियों में पैक कर भेजा जाता है, वहीं से यह सबरों तक पहुंचता है। उन्होंने कहा कि यदि चावल खराब पाया जाता है तो इसे बदलने के लिए धालभूमगढ़ गोदाम के व्यवस्थापक से संपर्क किया जाएगा। हालांकि गोदाम व्यवस्थापक का मोबाइल अभी स्विच ऑफ है, जिससे फिलहाल उनकी प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है।
आदिम जनजाति सबर समुदाय के उत्थान के लिए चलाई जा रही योजनाओं के बीच इस प्रकार की आपूर्ति विभाग की लापरवाही गंभीर चिंता का विषय है और प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है।