चाकुलिया संवाददाता (रोहन सिंह) उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने गुरुवार को चाकुलिया प्रखंड के केरूकोचा गांव का दौरा कर स्थानीय मत्स्यपालकों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने किसानों द्वारा अपनाई गई नई तकनीकों की जानकारी ली और मत्स्य पालन के क्षेत्र में उनकी पहल की सराहना की।
गांव के आठ प्रगतिशील किसान सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर बड़े पैमाने पर मत्स्य पालन कर रहे हैं। इनमें से तीन किसान 25-25 बायोफ्लॉक टैंक का संचालन कर रहे हैं, जबकि एक किसान ने 8 टैंक वाले रिस्पॉयरेटरी एक्वा कल्चर यूनिट की शुरुआत की है। वहीं, एक किसान 7 छोटे बायोफ्लॉक यूनिट और दूसरे किसान 4 टैंक से मत्स्य पालन कर रहे हैं। इसके अलावा एक किसान ने बायोफ्लॉक तालाब और फीड मिल स्थापित कर स्थानीय स्तर पर उत्पादन और रोजगार सृजन का मार्ग प्रशस्त किया है।

ये सभी पहल वर्ष 2022-23 और 2023-24 के बीच सरकारी योजनाओं के सहयोग से शुरू की गईं। इसका असर अब दिखाई देने लगा है— किसानों की आय में वृद्धि हुई है और क्षेत्र के अन्य किसान भी इस मॉडल से प्रेरणा ले रहे हैं।
उपायुक्त ने कहा कि जिले के अन्य किसान भी इन नवाचारों को अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति सुधार सकते हैं। उन्होंने जिला मत्स्य पदाधिकारी को निर्देश दिया कि मत्स्यपालन योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि अधिक से अधिक किसान इसका लाभ ले सकें। साथ ही, फीड मिल योजना से और किसानों को जोड़ने की बात भी कही।

उन्होंने मत्स्य पालन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए “अतिरिक्त आय का सशक्त जरिया” बताते हुए किसानों से अपील की कि वे सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ लें। उपायुक्त ने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत किसानों को बायोफ्लॉक टैंक, तालाब निर्माण और फीड मिल लगाने के लिए सब्सिडी व सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भरता और किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में मत्स्य पालन एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा। यह न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा।