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चाकुलिया गौशाला में मवेशियों को लेकर बवाल! झामुमो नेताओं ने उठाई वापसी की मांग

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संवाददाता रोहन सिंह की रिपोर्ट

चाकुलिया, 1 जून — जादूगोड़ा यूरेनियम निगम लिमिटेड (यूसीआईएल) द्वारा आवासीय कॉलोनी में लावारिस हालत में घूम रहे 13 मवेशियों को चाकुलिया स्थित ध्यान फाउंडेशन गौशाला में सौंपे जाने को लेकर रविवार को विवाद खड़ा हो गया। इस मुद्दे पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के जिला संयोजक बाघराय मांडी के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ता और जादूगोड़ा के ग्रामीण गौशाला पहुंचे और मवेशियों की वापसी की मांग की।

गौशाला से मवेशी लौटाने की मांग
झामुमो नेताओं ने गौशाला की संचालिका डॉ. शालिनी मिश्रा से मुलाकात कर यूसीआईएल द्वारा सौंपे गए मवेशियों को लौटाने की मांग की। इस पर डॉ. मिश्रा ने स्पष्ट किया कि मवेशी उन्हें विधिवत रूप से लिखित दस्तावेजों के साथ सौंपे गए हैं और वे केवल यूसीआईएल प्रबंधन के निर्देश पर ही उन्हें वापस कर सकती हैं।

मुखिया का पत्र सौंपा गया
ग्रामीणों ने दक्षिणी ईचड़ा पंचायत की मुखिया मंजरी बांद्रा का पत्र गौशाला प्रबंधन को सौंपा, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि जब्त किए गए गोवंश स्थानीय ग्रामीणों के हैं। पत्र में ग्रामीणों के नाम भी दर्ज हैं।

पहचान में आ रही है कठिनाई
गौशाला प्रबंधन ने बताया कि यूसीआईएल द्वारा लाए गए 13 मवेशी पहले से मौजूद लगभग 22,000 मवेशियों के बीच रखे गए हैं, जिससे उनकी त्वरित पहचान मुश्किल हो रही है।

विधायक से की गई बात
विवाद के समाधान हेतु झामुमो कार्यकर्ताओं ने विधायक समीर मोहंती से फोन पर बात कराई, जिसके बाद डॉ. शालिनी मिश्रा ने विधायक से व्यक्तिगत मुलाकात भी की। विधायक ने कहा कि ये मवेशी चोरी या तस्करी से संबंधित नहीं हैं, और यूसीआईएल से भी इस विषय में उन्होंने बात की है। उन्होंने सुझाव दिया कि गौशाला प्रबंधन बीएसएफ व पुलिस केस वाले मवेशियों को अलग रखे और स्थानीय ग्रामीणों के मवेशियों को अलग कर उनकी पहचान कर लौटाए।

जल्द होगी पहचान और वापसी
डॉ. शालिनी मिश्रा ने आश्वस्त किया कि गौशाला का उद्देश्य किसी का मवेशी रखना नहीं है और जल्द ही छह गाय, पांच बैल और दो बछड़ों की पहचान कर उन्हें उनके असली मालिकों को सौंप दिया जाएगा।

इस दौरान झामुमो के प्रखंड अध्यक्ष शिवचरण हांसदा, नगर अध्यक्ष मोहम्मद गुलाब, सचिव बलराम महतो, गोपन परिहारी, राजा बारिक और गौतम शर्मा सहित कई लोग उपस्थित थे। मामला फिलहाल शांत है, लेकिन स्थानीय प्रशासन की भूमिका भी अब अहम मानी जा रही है।