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आपातकाल की बरसी पर रांची विधायक सीपी सिंह ने साझा की जेल में बिताए दिनों की यादें

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रांची, 25 जून 2025:
भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 25 जून 1975 की रात को हमेशा एक काले अध्याय के रूप में याद किया जाता है। इसी दिन देश में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा आपातकाल लागू किया गया था, जिसने संविधान प्रदत्त अधिकारों और प्रेस की स्वतंत्रता पर गहरा आघात किया। लाखों नागरिकों की आवाजें दबा दी गईं और अभिव्यक्ति का अधिकार लगभग समाप्त हो गया।

इस अवसर पर रांची के वर्तमान विधायक सीपी सिंह ने उस दौर के अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे उस समय मारवाड़ी कॉलेज में इंटर के छात्र थे। लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले छात्र आंदोलन में उन्होंने सक्रिय भागीदारी की थी। देश की लोकतांत्रिक अस्मिता की रक्षा के लिए उन्होंने अपनी परीक्षा तक त्याग दी थी।

राजनीतिक गतिविधियों के चलते गिरफ्तारी और जेल का अनुभव

सीपी सिंह ने बताया कि उन्हें 26 जनवरी 1976 को गिरफ्तार कर कोतवाली थाना, फिर जेल भेज दिया गया, जहां उन्होंने लगभग एक वर्ष सलाखों के पीछे बिताया। जेल में भय और सन्नाटा पसरा रहता था, कोई मिलने तक नहीं आता था क्योंकि लोगों में यह डर था कि वे भी गिरफ्तारी की चपेट में आ सकते हैं।

उन्होंने कहा कि 30 जुलाई 1976 को रिहाई के बाद उन्होंने दोबारा आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की, और एक बार फिर से गिरफ्तारी की स्थिति उत्पन्न हो गई थी।

“आज भी इमरजेंसी की याद दिल दहला देती है” – सीपी सिंह

विधायक सीपी सिंह ने भावुक होते हुए कहा कि

“आपातकाल के दौरान लोकतंत्र को कुचलने की कोशिश की गई थी। जब भी उन दिनों की याद आती है, तो दिल कांप उठता है। वो समय डर, दबाव और असहायता का था।”

उन्होंने कहा कि उस दौर ने उन्हें न केवल एक राजनीतिक कार्यकर्ता बल्कि एक लोकतंत्र के प्रहरी के रूप में भी ढाल दिया। संघर्ष का ही परिणाम रहा कि उन्होंने आगे चलकर राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई और आज वे रांची विधानसभा सीट से सात बार के निर्वाचित विधायक हैं।

लोकतंत्र को समझने और संरक्षित करने की अपील

सीपी सिंह ने युवाओं से अपील की कि वे लोकतंत्र को केवल अधिकारों का माध्यम न मानें, बल्कि इसकी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी को भी समझें। उन्होंने कहा कि आजादी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की कीमत उन्हीं लोगों ने चुकाई है, जिन्होंने उसे बचाने के लिए अपनी युवावस्था तक दांव पर लगा दी थी।