रांची, 6 जून 2025
भारत के स्वतंत्रता सेनानी, संविधान निर्माता, ओलंपिक विजेता और आदिवासी समाज के महान नेता कैप्टन जयपाल सिंह मुंडा को मरणोपरांत ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करने की मांग फिर तेज हो गई है।
जंगलमहल स्वराज मोर्चा (JSM) ने शुक्रवार को महामहिम राज्यपाल के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजते हुए इस मांग को औपचारिक रूप से दोहराया है। JSM के केंद्रीय समिति सदस्य अरित्र महतो ने पत्र में जयपाल सिंह मुंडा के जीवन, आदिवासी अधिकारों के लिए उनके संघर्ष और राष्ट्रीय योगदानों को विस्तार से रेखांकित किया।
🔶 जयपाल सिंह मुंडा: एक व्यक्तित्व, अनेक आयाम
1928 एम्स्टर्डम ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम का नेतृत्व कर भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाया।
भारत के पहले आदिवासी अंतरराष्ट्रीय खेल कप्तान के रूप में इतिहास रचा।
भारतीय सिविल सेवा में चयनित होकर शिक्षा व प्रशासनिक क्षेत्र में दी सेवाएं।
आदिवासी महासभा के अध्यक्ष बने और 1946 में संविधान सभा सदस्य के रूप में आदिवासी अधिकारों की वकालत की।
स्वतंत्रता के बाद झारखंड पार्टी की स्थापना की और 1952 से 1970 तक खूँटी से लोकसभा सांसद रहे।
आदिवासी समाज में उन्हें “मरांग गोमके” यानी महान नेता के रूप में सम्मानित किया जाता है।
🔶 “भारत रत्न से होगा सच्चा सम्मान” – अरित्र महतो
पत्र में अरित्र महतो ने लिखा,
“जयपाल सिंह मुंडा का जीवन नेतृत्व, शिक्षा, खेल और संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई का प्रतीक है। यदि उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जाता है, तो यह केवल उन्हें श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि देश के करोड़ों आदिवासियों को न्याय और आत्मगौरव का अहसास कराएगा।”
🔶 राजनीतिक और सामाजिक हलकों में समर्थन
झारखंड समेत देशभर में आदिवासी संगठनों और नागरिक समाज के बीच यह मांग लंबे समय से उठती रही है।
अब जंगलमहल स्वराज मोर्चा द्वारा केंद्र सरकार तक औपचारिक प्रस्ताव भेजे जाने से यह विषय एक बार फिर राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में आ गया है।