अबुआ खबर डेस्क
असम विधानसभा चुनाव के बीच हेमंत सोरेन ने चुनावी मैदान में अपनी सक्रियता बढ़ाते हुए कई जनसभाओं को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने राज्य की मौजूदा सरकार और केंद्र की नीतियों पर तीखा प्रहार करते हुए खुद को आदिवासी और वंचित वर्गों की आवाज बताया।
असम के विभिन्न इलाकों में आयोजित सभाओं में सोरेन ने कहा कि उनकी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा का मूल उद्देश्य आदिवासी, दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों की रक्षा करना है। उन्होंने दावा किया कि असम में भी उनकी पार्टी इसी सोच के साथ जनता के बीच पहुंच रही है।
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भाजपा सरकार पर सीधा हमला
सोरेन ने भारतीय जनता पार्टी की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि वर्तमान राजनीतिक माहौल में समाज को बांटने की कोशिशें हो रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकता आम जनता की समस्याओं के समाधान के बजाय राजनीतिक लाभ हासिल करना बन गया है।
चाय बागान मजदूरों का मुद्दा उठाया
अपने संबोधन में उन्होंने असम के चाय बागान मजदूरों की स्थिति को लेकर चिंता जताई। सोरेन ने कहा कि इन मजदूरों को पर्याप्त मजदूरी और सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, जिससे उनका जीवन स्तर प्रभावित हो रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उनकी पार्टी इन वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेगी।
NRC और CAA पर टिप्पणी
सोरेन ने राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) और नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) जैसे मुद्दों पर भी अपनी राय रखते हुए कहा कि इनसे समाज में विभाजन की स्थिति बनी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी वर्गों को साथ लेकर चलना ही देश और राज्य के विकास के लिए जरूरी है।
चुनावी वादों पर उठाए सवाल
उन्होंने चुनाव के दौरान किए जा रहे वादों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जनता को दी जाने वाली आर्थिक सहायता योजनाएं स्थायी समाधान नहीं होतीं। सरकार को ऐसे कदम उठाने चाहिए जिससे लोगों की आय और जीवन स्तर में दीर्घकालिक सुधार हो सके।
राजनीतिक माहौल गरमाया
असम में चुनावी सरगर्मी के बीच हेमंत सोरेन के इन बयानों से राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इन मुद्दों का चुनावी समीकरण पर क्या असर पड़ता है।