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फॉलो-अप: जयपुरा गांव छुआछूत मामला: पुलिस की कार्रवाई के बाद माहौल शांत, आरोपी नाइयों की पहचान शुरू

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बहरागोड़ा, संवाददाता।
पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा प्रखंड अंतर्गत बरसोल थाना क्षेत्र के जयपुरा गांव में महादलित परिवारों के साथ किए गए जातिगत भेदभाव मामले में अब स्थिति धीरे-धीरे नियंत्रण में आ रही है। पुलिस की हस्तक्षेप और पीड़ितों की शिकायत के बाद गांव का माहौल शांत बताया जा रहा है। थाना प्रभारी के आश्वासन के बाद आरोपियों की पहचान की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

करीब एक महीने से जयपुरा गांव के महादलित परिवारों को स्थानीय नाइयों द्वारा बाल काटने से मना कर दिया गया था। पीड़ित परिवारों ने बताया कि यह व्यवहार लगातार सामाजिक अपमान और बहिष्कार जैसा था, जिससे परिवारों में रोष और मानसिक तनाव बढ़ रहा था। मामले के गंभीर होने पर इसे जातिगत छुआछूत के रूप में देखा जा रहा है।

नाइयों द्वारा सेवा से इनकार किए जाने पर महादलित परिवारों ने यह जानकारी भाजपा नेता विमल किशोर बैठा को दी। उन्होंने तुरंत मामले को संज्ञान में लेते हुए पीड़ितों के साथ बैठक की और समस्या को प्रशासन तक पहुंचाने का निर्णय लिया। स्थानीय स्तर पर समाधान न मिलने पर पीड़ितों ने सामूहिक रूप से थाना जाने का फैसला किया।

महादेव बैठा, राखहरि मुखी, दिलीप मंडल, किशोर मंडल, सत्यवान ढुली, सुकुमार बैठा, सागर कालिंदी, तापस बैठा सहित अन्य कई महादलित परिवार सोमवार को विमल किशोर बैठा के साथ बरसोल थाना पहुंचे। वहां उन्होंने थाना प्रभारी अभिषेक कुमार को पूरी घटना विस्तार से बताई।

थाना प्रभारी ने पीड़ितों को आश्वस्त करते हुए कहा कि
“समाज में इस प्रकार की कुप्रथा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषियों की पहचान कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

थाना प्रभारी ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए नाइयों की पहचान करने का निर्देश दिया है। पुलिस ने बताया कि प्रथम दृष्टया घटना जातीय आधार पर भेदभाव की प्रतीत होती है, जो कानूनन दंडनीय अपराध है। दोषियों को जल्द ही थाना लाया जाएगा और पूछताछ के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस हस्तक्षेप के बाद गांव में तनाव कम हुआ है। थाना प्रभारी अभिषेक कुमार ने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है और भरोसा दिलाया है कि किसी भी प्रकार के अन्याय को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

पुलिस के आश्वासन के बाद महादलित परिवारों ने राहत की सांस ली है। उन्होंने कहा कि अब उम्मीद है कि गांव में फिर से समानता और सौहार्द का माहौल स्थापित होगा।