झारखंड में ई-कल्याण छात्रवृत्ति योजना को लेकर छात्र वर्ग में नाराजगी दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। छात्र लगातार स्कॉलरशिप न मिलने से परेशान हैं और इसका असर उनकी पढ़ाई पर साफ तौर पर देखा जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर डुमरी से निर्दलीय विधायक जयराम महतो की पार्टी ने सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा की है, जो तेजी से वायरल हो रही है और राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुकी है।
विधायक महतो की पार्टी jbkss ने पोस्ट में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य के मंत्री चमरा लिंडा को टैग किया है। साथ ही पोस्ट में एक चित्र भी साझा किया गया है, जिसमें मुख्यमंत्री और मंत्री के कथित फोटो के नीचे लिखा गया है— “क्या यही है छात्र कल्याण का ढोंग?”। इस कटाक्ष के साथ jbkss ने पूछा है कि आखिर झारखंड के छात्र कब तक छात्रवृत्ति का इंतजार करते रहेंगे।
उन्होंने लिखा है कि राज्य के छात्र आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। नई शिक्षा नीति से भी छात्रों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर तब जब नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने वाला है, ऐसे में स्कॉलरशिप न मिलने से कई छात्र पढ़ाई से वंचित हो सकते हैं। कई छात्र फीस नहीं भर पाने के कारण संस्थानों से ड्रॉप आउट करने को मजबूर हो रहे हैं।
गौरतलब है कि झारखंड सरकार हर वर्ष ई-कल्याण योजना के तहत राज्य के भीतर और बाहर पढ़ाई कर रहे छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान करती है। यह योजना अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए लागू है। योजना के अंतर्गत 11वीं कक्षा से लेकर पीएचडी या उच्च शिक्षा स्तर तक पढ़ाई करने वाले छात्र लाभ उठा सकते हैं।
हालांकि स्कॉलरशिप की राशि पूर्व से निर्धारित नहीं होती। यह संबंधित छात्र के पाठ्यक्रम और संस्थान की फीस पर निर्भर करती है। छात्रों को प्रत्येक वर्ष नया आवेदन देना होता है। लेकिन पिछले कुछ महीनों से छात्रवृत्ति की राशि जारी नहीं होने के कारण हजारों छात्र प्रभावित हुए हैं।
आपको बता दें कि हाल ही में विधायक महतो ने निजी वेतन से कुछ छात्रों को आर्थिक सहायता दे चुके हैं, लेकिन इस बार उनके पार्टी के द्वारा इसे सार्वजनिक मंच से मुद्दा बना दिया है। उनका कहना है कि छात्रों का भविष्य अधर में है और सरकार की चुप्पी दुर्भाग्यपूर्ण है।वही सरकार की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सोशल मीडिया और छात्रों के बीच इस पोस्ट को लेकर चर्चा जोरों पर है। छात्र संगठनों ने भी सरकार से जल्द कार्रवाई की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि स्कॉलरशिप जारी नहीं की गई तो वे बड़े आंदोलन की तैयारी करेंगे।
अब देखना होगा कि सरकार इस गंभीर मुद्दे को कब तक नजरअंदाज करती है या छात्रों की आवाज़ को प्राथमिकता देते हुए कोई ठोस निर्णय लेती है। फिलहाल छात्रों को जवाब का इंतजार है।