रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) सिविल सेवा परीक्षा 2025 में कथित गड़बड़ियों की जांच अब और तेज हो गई है। मामले की जांच कर रही झारखंड सीआईडी की विशेष जांच टीम (SIT) ने प्रारंभिक परीक्षा (PT) में सफल घोषित उम्मीदवारों से पेपर-1 और पेपर-2 की ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी उपलब्ध कराने की अपील की है। इसके साथ ही आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते से लगातार दूसरे दिन भी कई घंटे तक पूछताछ की गई।
पूर्व अध्यक्ष से कई बिंदुओं पर पूछताछ
जांच अधिकारियों ने परीक्षा संचालन, चयन प्रक्रिया और भर्ती से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर पूर्व अध्यक्ष से विस्तृत जानकारी ली। सीआईडी दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य संबंधित लोगों के बयानों का मिलान कर पूरे मामले की जांच आगे बढ़ा रही है। पूछताछ के बाद उन्हें जाने की अनुमति दी गई, जबकि आगे की पूछताछ के लिए 31 जुलाई को फिर बुलाया गया है।
5 अगस्त तक मांगी गई OMR शीट
सीआईडी ने पीटी परीक्षा में सफल सभी अभ्यर्थियों से 30 जुलाई से 5 अगस्त के बीच अपनी ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी भेजने का अनुरोध किया है। उम्मीदवार पेपर-1 और पेपर-2 की ओएमआर शीट का पीडीएफ या स्पष्ट फोटो व्हाट्सएप अथवा ईमेल के माध्यम से उपलब्ध करा सकते हैं।
जांच से जुड़ी सूचना या दस्तावेज साझा करने के लिए सीआईडी ने व्हाट्सएप नंबर 9934309058 और ईमेल Complainjpsc.cid@jhpolice.gov.in जारी किया है।
श्वेता गुप्ता की प्रतिनियुक्ति पर भी जांच
सीआईडी जांच के दौरान जेपीएससी की अवर सचिव सह उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता की प्रतिनियुक्ति को लेकर भी नए तथ्य सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार, वर्ष 2026 में उनका स्थानांतरण खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग में किया गया था, जबकि उप सचिव सरोजनी एनी तिर्की का तबादला लातेहार में परियोजना निदेशक के पद पर हुआ था।
बताया गया कि दोनों अधिकारियों ने अपने नए पद पर तत्काल योगदान नहीं दिया। इसके बाद कार्मिक विभाग ने जून 2026 के अंत में नोटिस जारी कर समय पर योगदान नहीं देने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी। बाद में दोनों अधिकारियों ने जुलाई के पहले सप्ताह में नए पद पर योगदान दिया, लेकिन जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष के अनुरोध पर उन्हें 15 दिनों के लिए फिर से आयोग में प्रतिनियुक्ति पर भेज दिया गया। इसी दौरान 21 जुलाई को सीआईडी ने जेपीएससी कार्यालय में छापेमारी की, जिसमें श्वेता गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया गया।
TDPL कर्मियों की भूमिका भी जांच के घेरे में
जांच एजेंसी अब परीक्षा संचालन से जुड़े टीडीपीएल कर्मियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि एजेंसी के कर्मचारियों के लिए आयोग कार्यालय में अलग व्यवस्था थी। आरोप है कि परीक्षा से जुड़े कुछ दस्तावेज कार्यालय से बाहर भी ले जाए जाते थे, जबकि नियम इसकी अनुमति नहीं देते।
सीआईडी यह भी जांच कर रही है कि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े तकनीकी कार्यों की निगरानी किस प्रकार की गई और तत्कालीन अधिकारियों ने नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए।
आगे क्या करेगी सीआईडी ?
जांच एजेंसी अभ्यर्थियों से प्राप्त ओएमआर शीट की प्रतियों का आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड से मिलान करेगी। यदि जांच के दौरान किसी प्रकार की विसंगति या अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों, एजेंसी के कर्मचारियों और अन्य जुड़े लोगों से आगे भी पूछताछ की जाएगी। सीआईडी का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की पूरी श्रृंखला का पता लगाकर जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट करना है।