रांची, संवाददाता
रांची में बुधवार को पेसा (PESA) कानून की नियमावली को लेकर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें झारखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस अवसर पर कानून को जनभागीदारी के साथ प्रभावी रूप से लागू करने और ग्रामसभा को वास्तविक निर्णयकर्ता बनाने पर बल दिया गया।
कार्यशाला में कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि पेसा कानून सिर्फ कानूनी अधिकार नहीं, बल्कि आदिवासी समुदाय की पहचान, स्वशासन और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा का माध्यम है। उन्होंने कहा कि झारखंड जैसे राज्य में इस कानून का क्रियान्वयन पूरी संवेदनशीलता और क्षेत्रीय ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए होना चाहिए।

ग्रामसभा को मिलें संवैधानिक अधिकार
नेताओं ने कहा कि जब तक ग्रामसभाओं को प्रशासनिक, आर्थिक और सामाजिक निर्णयों में सीधी भागीदारी नहीं मिलेगी, तब तक पेसा कानून का उद्देश्य अधूरा रहेगा। कांग्रेस ने इस दिशा में ठोस रणनीति तैयार करने और आम लोगों को इस कानून के प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया।
नेतृत्व ने रखे स्पष्ट विचार
इस कार्यशाला में झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू, प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, कांग्रेस महासचिव प्रसाद श्रीवेला, वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, विधायक दल के नेता प्रदीप यादव, मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, इरफान अंसारी, पाकुड़ विधायक निशात आलम, पूर्व मंत्री बंधनु तिर्की और लोहरदगा सांसद सुखदेव भगत सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया।
वक्ताओं ने पेसा को आदिवासी अधिकारों की रक्षा और स्वशासन की दिशा में मील का पत्थर बताया और कहा कि झारखंड को आदिवासी सशक्तिकरण का राष्ट्रीय मॉडल बनाया जाएगा।