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पोटका विधायक संजीव सरदार ने उठाई रैयतों के मुआवज़े की आवाज़, डीसी से की मुलाकात—किसानों के अधिकार पर गंभीर चिंता जताई

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जमशेदपुर : पोटका विधानसभा क्षेत्र से विधायक संजीव सरदार ने मंगलवार को उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी से मुलाक़ात कर रैयतों के बकाया मुआवज़े के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि पोटका, डुमरिया और जमशेदपुर प्रखंड में सड़क परियोजनाओं के लिए ग्रामीणों ने अपनी ज़मीन सरकार को सौंपकर विकास कार्यों का रास्ता प्रशस्त किया, लेकिन अब तक उचित मुआवज़ा नहीं मिलना उनके साथ अन्याय है।

विधायक ने डीसी से स्पष्ट कहा कि यदि जल्द भुगतान की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई, तो वे इस मामले को मुख्यमंत्री के समक्ष रखेंगे और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग करेंगे। जानकारी के अनुसार, तीन महत्वपूर्ण सड़क योजनाओं का 80 से 90 प्रतिशत तक कार्य पूरा हो चुका है, पर भूमि अधिग्रहण से प्रभावित रैयत अभी भी अपने हिस्से की राशि का इंतज़ार कर रहे हैं।

समस्या केवल मुआवज़े की नहीं, बल्कि जनसुविधाओं की भी है। विधायक सरदार ने पोटका, डुमरिया और जमशेदपुर प्रखंड के कई भीड़भाड़ वाले स्थानों पर नई हाई मास्ट लाइटें लगाने पर जोर दिया। उनका कहना था कि कई जगह रात के समय निर्णायक रोशनी न होने से दुर्घटनाओं, असामाजिक गतिविधियों और सुरक्षा खतरे की संभावना बढ़ जाती है।

उन्होंने यह भी बताया कि पोटका व जमशेदपुर में छह से अधिक हाई मास्ट लाइटें लंबे समय से खराब पड़ी हैं, जिससे स्थानीय ग्रामीणों व राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। विधायक ने तत्काल मरम्मत करवाकर नए लाइट पोल लगाने की दिशा में कदम उठाने का आग्रह किया।

बैठक के दौरान विधायक ने करणडीह चौक की गंभीर यातायात समस्या पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि इस मार्ग पर लगातार बढ़ते वाहन दबाव के कारण जाम की स्थिति रोज़ाना बनी रहती है। कई बार एम्बुलेंस और आपातकालीन वाहन भी घंटों फंसे रह जाते हैं, जिससे मरीजों की जान खतरे में पड़ती है।

उन्होंने प्रस्ताव रखा कि यदि यहां आधुनिक ट्रैफिक सिग्नल लगाए जाएँ, तो जाम, दुर्घटना और इमरजेंसी वाहनों की रुकावट जैसी समस्याओं से बड़ी राहत मिलेगी। इस सुझाव पर डीसी ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।

विधायक संजीव सरदार ने मुलाक़ात में नरवा, तुरामडीह और बांदूहुडान के यूसीआईएल परियोजना प्रभावित परिवारों के पुनर्वास से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की। उन्होंने डीसी से कहा कि विस्थापित ग्रामीण लंबे समय से रोजगार, आवास, भूखंड, साफ पेयजल, बिजली और मूलभूत सुविधाओं की मांग कर रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं निकल पाया है।

उन्होंने मांग की कि जिला प्रशासन त्रिपक्षीय बैठक कर समस्याओं का स्थायी समाधान निकाले और विस्थापित परिवारों को उनका वाजिब हक दिलाए।

विधायक सरदार ने दो प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों—बाबा मुक्तेश्वर धाम (हरिणा) और रांकिनी मंदिर (जादूगोड़ा)—में स्ट्रीट लाइटों के अभाव पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ये स्थल राज्य स्तरीय ‘C’ ग्रेड पर्यटन स्थल हैं, जहाँ प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।

रात के समय अपर्याप्त रोशनी के कारण श्रद्धालुओं को परेशानी होती है और सुरक्षा जोखिम भी बढ़ जाता है। उन्होंने दोनों स्थानों पर ऊर्जा-प्रभावी स्ट्रीट लाइटें लगाने की मांग की।

लंबी चर्चा के बाद उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने विधायक को आश्वासन दिया कि सभी मांगों पर तेजी से कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन रैयतों के हितों, जनसुविधाओं के विस्तार और विस्थापित परिवारों के पुनर्वास को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाएगा।