जमशेदपुर, 27 मई 2025:
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), पूर्वी सिंहभूम जिला समिति द्वारा आज समाहरणालय परिसर, जमशेदपुर में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन का आयोजन किया गया। इस जनांदोलन का मुख्य उद्देश्य भारत सरकार से सरना/आदिवासी धर्म कोड की शीघ्र स्वीकृति की मांग करना था।
धरना स्थल पर बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के प्रतिनिधि, बहरागोड़ा विधानसभा विधायक समीर कुमार मोहंती , जुगसलाई विधायक मंगल कालिंदी झामुमो प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी सहित झामुमो कार्यकर्ता तथा आमजन उपस्थित हुए। प्रदर्शन के दौरान “सरना धर्म कोड लागू करो” एवं “जब तक धर्म कोड नहीं, तब तक जनगणना नहीं” जैसे नारों से वातावरण गूंज उठा।
नेताओं ने अपने संबोधन में कहा कि यह केवल एक धर्म कोड की मांग नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान, धार्मिक आस्था तथा ऐतिहासिक अधिकारों की रक्षा का प्रश्न है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक आदिवासी धर्म को संवैधानिक मान्यता नहीं दी जाती, तब तक जातिगत जनगणना को पूर्ण एवं निष्पक्ष नहीं माना जा सकता।
पृष्ठभूमि:
आदिवासी समाज की यह मांग विगत अनेक वर्षों से प्रचलित है कि उन्हें भारत की जनगणना में पृथक धार्मिक पहचान प्रदान की जाए। वर्तमान में जनगणना प्रपत्र में “सरना” या “आदिवासी धर्म” के लिए कोई पृथक विकल्प नहीं है, जिससे उनकी सांस्कृतिक अस्मिता को उचित मान्यता नहीं मिल पा रही है।