रांची: राज्य में सामने आए शराब घोटाले की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच रही है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) लगातार कार्रवाई के मोड में है। बीते दिनों पूर्व आईएएस अधिकारी अमित प्रकाश की गिरफ्तारी के बाद बुधवार को एसीबी ने उनसे लंबी पूछताछ की। इसी क्रम में एसीबी की एक विशेष टीम उत्पाद विभाग के विभिन्न कार्यालयों में छापेमारी के लिए पहुंची, जहां घंटों तलाशी अभियान चलाया गया।
इस दौरान एसीबी टीम ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और फाइलें जब्त कीं। सूत्रों के अनुसार, इन दस्तावेजों से कई नए नाम सामने आए हैं, जिनसे जल्द पूछताछ की जाएगी।
100 करोड़ से अधिक के घोटाले की आशंका
अब तक सामने आए तथ्यों के अनुसार, यह घोटाला 38 करोड़ रुपये तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसियों को ऐसे प्रमाण मिले हैं जो संकेत देते हैं कि घोटाले की राशि 100 करोड़ से भी अधिक हो सकती है। दस्तावेजों में कई अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम दर्ज हैं, जिनकी भूमिका की गहन जांच की जा रही है।
फर्जी बैंक गारंटी से कार्य आवंटन के प्रमाण
जांच में यह भी सामने आया है कि फर्जी बैंक गारंटी के जरिए कार्य आवंटन किए गए। इस मामले में एसीबी ने 30 से अधिक लोगों को समन भेजा है। समन की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई है।
व्यापारियों और कंपनियों पर शिकंजा
व्यवसायी विनय सिंह और सिद्धार्थ सिंघानिया के खिलाफ कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट लिया गया है, क्योंकि उन्होंने एसीबी के समन का पालन नहीं किया। इसके अलावा गुजरात स्थित ‘विजन हॉस्पिटैलिटी सर्विस एंड कंसलटेंट्स’ से जुड़े बिपिन जाधवभाई परमार, महेश शेडगे, परेश ठाकोर और विक्रमसिंह ठाकोर पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।
इसी तरह ‘मार्शन इनोवेटिव सिक्युरिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड’ से जुड़े जगन तुकाराम देसाई, कमल जगन देसाई और शीतल जगन देसाई के खिलाफ भी कोर्ट में गिरफ्तारी वारंट की अर्जी दी गई है।
एसीबी की जांच में और नाम आएंगे सामने
सूत्रों की मानें तो यह घोटाला विभागीय स्तर पर योजनाबद्ध तरीके से किया गया। पहले से सामने आ चुकी जानकारी के अनुसार, आईएएस विनय चौबे द्वारा एक विशेष कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया गया था, जिससे मामले की गंभीरता और गहराती जा रही है।
अब तक 6 गिरफ्तारियां
अब तक इस मामले में 6 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें शामिल हैं:
- आईएएस विनय चौबे
- उत्पाद आयुक्त गजेंद्र सिंह
- पूर्व उत्पाद आयुक्त अमित प्रकाश
- नीरज सिंह
- सुधीर दास
- सुधीर कुमार
जांच की रफ्तार तेज होती जा रही है और संभावना है कि जल्द ही और गिरफ्तारियां होंगी। यह घोटाला अब राज्य प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।