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भाजपा नेता विक्रम सिंह ने लगाए बड़े नेताओं पर पक्षपात के आरोप, कहा — जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी हो रही है

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जादूगोड़ा। संवाददाता।
भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के जादूगोड़ा मंडल अध्यक्ष विक्रम सिंह ने अपनी ही पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं पर पक्षपात और जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि अभय सिंह, सरोज सिंह और गुरुचरण रजवाड़ा जैसे नेता केवल अपने चहेतों को आगे बढ़ा रहे हैं, जबकि लंबे समय से मेहनत करने वाले समर्पित कार्यकर्ताओं को दरकिनार किया जा रहा है।

विक्रम सिंह ने बताया कि हाल ही में इन नेताओं की मौजूदगी में आयोजित एक बैठक में स्थानीय कार्यकर्ताओं की भागीदारी बेहद कम रही, फिर भी बैठक को सफल बताया गया। उन्होंने कहा —

“जब मैंने देखा कि वास्तविक उपस्थिति नहीं के बराबर थी और फिर भी बैठक को सफल बताया गया, तो मुझे चिंता हुई कि यह पार्टी और प्रत्याशी दोनों के लिए भ्रम की स्थिति बना रहा है।”

उन्होंने आगे कहा कि जादूगोड़ा के संयोजक को जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन वह अधिकतर समय घाटशिला में रहते हैं, जिससे स्थानीय संगठन कमजोर पड़ रहा है। विक्रम सिंह ने बताया कि जादूगोड़ा मंडल के 24 बूथों में से कई बूथों की स्थिति आपसी मतभेद और निष्क्रियता के कारण कमजोर है, विशेष रूप से बूथ संख्या 215 और 217 में कार्यकर्ताओं की सक्रियता न के बराबर है।

विक्रम सिंह ने आरोप लगाया कि कई बैठकों में केवल औपचारिकता निभाई जाती है —

“कुछ महिलाओं को बुलाकर फोटो खींचवा लिया जाता है ताकि रिपोर्ट में सब ठीक दिखे, जबकि वास्तविक जनसंपर्क नहीं हो रहा है।”

उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से संगठन को मजबूत करने के लिए मेहनत कर रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर काम न होने और दिखावटी राजनीति बढ़ने से कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट रहा है। उनका आरोप है कि भाजपा प्रत्याशी बाबूलाल सोरेन को वास्तविक स्थिति से अंधेरे में रखा जा रहा है, जिससे चुनावी रणनीति प्रभावित हो सकती है।

उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और आलाकमान से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। विक्रम सिंह ने चेतावनी दी कि यदि स्थिति नहीं सुधरी, तो इसका असर आगामी चुनाव परिणामों पर स्पष्ट रूप से दिखेगा।

इधर, इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा प्रदेश मंत्री सह जादूगोड़ा मंडल बूथ प्रभारी सरोज सिंह ने कहा कि विक्रम सिंह को अपनी शिकायतें संगठन के भीतर रखनी चाहिए थीं।

“पार्टी में सभी को अपनी बात रखने की आज़ादी है, लेकिन अनुशासन सर्वोपरि है। इस तरह सार्वजनिक रूप से बयान देना संगठन की मर्यादा के खिलाफ है। उनके बयान से लगता है कि वे पार्टी अनुशासन भूल गए हैं,”
उन्होंने कहा।