पेयजल संकट से जूझ रहा आदिवासी टोला
चाकुलिया संवाददाता (रोहन सिंह) : चाकुलिया प्रखंड की सिमदी पंचायत अंतर्गत कुमारीशोल गांव के आदिवासी टोला में रहने वाले ग्रामीण पेयजल के गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक उदासीनता के चलते इस टोला के लगभग 12 परिवार आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।
पांच वर्षों से खराब पड़ा सरकारी चापाकल
गांव में लगा एकमात्र सरकारी चापाकल पिछले पांच साल से खराब है। टोला में कोई कुआं भी उपलब्ध नहीं है, जिससे ग्रामीणों को सालभर कुमारीशोल खाल में चुंआ खोदकर उसी का पानी पीने की मजबूरी बनी हुई है।

खाल से पानी भरने को विवश महिलाएं
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गुरुवार को चाकुलिया–शीशाखुन सड़क किनारे बसे इस टोला में महिला सुकुल मनी सोरेन को सूखी खाल में खोदे गए चुंआ से कटोरे के सहारे पानी भरते देखा गया। महिलाओं ने बताया कि गर्मी के मौसम में खाल सूख जाने से पानी मिलना बेहद कठिन हो जाता है।
बरसात में भी बढ़ जाती है परेशानी
ग्रामीणों के अनुसार, बारिश के दिनों में खाल भर जाने से पेयजल की समस्या और अधिक गंभीर हो जाती है। नहाने के लिए ग्रामीणों को करीब एक किलोमीटर दूर दूसरे मौजा के तालाब तक जाना पड़ता है।
मरम्मत और कुआं निर्माण की नहीं हुई पहल
टोला के मालती महतो, सुनीता महतो, सालगे सोरेन, राम सोरेन, लखी महतो, फुलमनी सोरेन, उपल सोरेन और मंगल सोरेन ने बताया कि चापाकल खराब होने के बावजूद न तो उसकी मरम्मत कराई गई और न ही किसी जनप्रतिनिधि ने कुआं निर्माण की पहल की।
नया चापाकल लगाने का आश्वासन
इस संबंध में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कनीय अभियंता भागीरथ रवानी ने बताया कि उक्त टोला में शीघ्र ही नया चापाकल स्थापित करने की पहल की जाएगी।