बहरागोड़ा: बहरागोड़ा प्रखंड की साकरा पंचायत स्थित धाधिका गांव का ऐतिहासिक राजबांध इन दिनों उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। वर्षों से नियमित साफ-सफाई नहीं होने के कारण बांध पूरी तरह जलकुंभी और झाड़ियों से भर गया है। इसका असर न केवल सिंचाई व्यवस्था पर पड़ा है, बल्कि आसपास के ग्रामीणों के दैनिक उपयोग पर भी पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कभी यह राजबांध क्षेत्र की कृषि व्यवस्था की जीवनरेखा माना जाता था। इसके पानी से एक हजार बीघा से अधिक कृषि भूमि की सिंचाई होती थी, जिससे किसानों को खेती में काफी सुविधा मिलती थी। लेकिन वर्तमान में बांध की स्थिति खराब होने के कारण सिंचाई व्यवस्था लगभग ठप हो गई है।
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ग्रामीणों के अनुसार, जलकुंभी और घनी झाड़ियों के कारण बांध का जल उपयोग योग्य नहीं रह गया है। इससे ग्रामीणों को नहाने और अन्य घरेलू कार्यों में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं किसानों को सिंचाई के लिए वैकल्पिक साधनों पर निर्भर होना पड़ रहा है, जिससे खेती की लागत बढ़ रही है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि गर्मी के मौसम में फसलों को बचाने के लिए उन्हें महंगे दामों पर पानी खरीदना पड़ता है। उनका आरोप है कि लंबे समय से प्रशासनिक स्तर पर बांध की सफाई और रखरखाव को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की गई, जिसका खामियाजा क्षेत्र के किसान उठा रहे हैं।
ग्रामीणों और किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि धाधिका राजबांध की जल्द से जल्द गहरी सफाई कराई जाए और उसका जीर्णोद्धार कराया जाए। उनका कहना है कि यदि बांध को पुनर्जीवित किया जाता है तो इससे सिंचाई व्यवस्था मजबूत होगी, किसानों को राहत मिलेगी और क्षेत्र की कृषि व्यवस्था को नया संबल मिलेगा।