घाटशिला, 11 नवंबर 2025:
घाटशिला विधानसभा उपचुनाव के मतदान के बाद अब सियासी पारा चढ़ गया है। भाजपा और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) दोनों दलों ने एक-दूसरे पर राजनीतिक वार करते हुए अपनी-अपनी जीत का दावा किया है।
भाजपा ने इसे “जनता का आशीर्वाद” बताया, तो झामुमो ने भाजपा के दावे को “हार की आशंका में की गई जल्दबाज़ी” करार दिया।
भाजपा का दावा — जनता ने सुशासन और विकास के नाम पर वोट किया
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने प्रेस वार्ता में कहा कि घाटशिला उपचुनाव शांतिपूर्ण और पारदर्शी माहौल में संपन्न हुआ।
मरांडी ने कहा कि जनता ने भाजपा उम्मीदवार पर भरोसा जताया है और इस बार परिणाम भाजपा के पक्ष में आएंगे।
उन्होंने कहा, “घाटशिला की जनता ने झूठे वादों और राजनीतिक भ्रम से तंग आकर विकास और स्थिरता को चुना है। भाजपा का विजय मार्ग जनता के विश्वास पर टिका है।”
झामुमो का पलटवार — भाजपा की बयानबाज़ी हताशा का संकेत
भाजपा के इस दावे पर झामुमो ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। झामुमो के महासचिव और प्रवक्ता विनोद पांडेय ने कहा कि भाजपा को अपनी हार का अंदेशा हो चुका है, इसलिए वे पहले से ही भ्रम फैलाने में जुट गए हैं।
उन्होंने कहा, “घाटशिला की जनता ने झूठ और विभाजन की राजनीति को नकार दिया है। हेमंत सरकार के कार्यकाल में विकास, विश्वास और जनकल्याण को प्राथमिकता दी गई है — और यही हमारी जीत की असली ताकत है।”
पांडेय ने आगे कहा कि हेमंत सरकार ने आदिवासी युवाओं के रोजगार, ग्रामीण सड़क निर्माण, सिंचाई व्यवस्था और शिक्षा-स्वास्थ्य के क्षेत्र में ठोस कदम उठाए हैं, जिन्हें जनता ने सराहा है।
घाटशिला उपचुनाव: झारखंड की राजनीति का अहम मोड़
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि घाटशिला उपचुनाव सिर्फ एक सीट की जंग नहीं, बल्कि झारखंड की दो प्रमुख राजनीतिक विचारधाराओं — भाजपा और झामुमो — के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई है।
भाजपा इस उपचुनाव को राज्य सरकार की नीतियों पर जनमत बता रही है, वहीं झामुमो इसे जनता द्वारा हेमंत सोरेन सरकार के कामकाज पर जताया गया विश्वास मान रही है।
अब सभी की निगाहें 14 नवंबर पर टिकी हैं, जब परिणाम यह तय करेंगे कि घाटशिला की जनता ने विकास की राजनीति को प्राथमिकता दी या विरोध की आवाज़ को।