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बहरागोड़ा: प्रशासन की नाक के नीचे फल-फूल रहा अवैध बालू कारोबार, सरकार को हो रहा भारी राजस्व नुकसान

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बहरागोड़ा | अबुआ खबर संवाददाता

बहरागोड़ा प्रखंड के पानीपड़ा नागुडसाई, महुलडांगरी, बामडोल, गुहियापाल और मधुआबेड़ा क्षेत्रों में स्वर्णरेखा नदी घाटों से अवैध रूप से बालू निकासी का कारोबार धड़ल्ले से जारी है। बताया जा रहा है कि यह अवैध गतिविधि पिछले एक महीने से प्रशासन की आंखों के सामने चल रही है, लेकिन रोकथाम के कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे।

हर दिन भोर के तीन बजे से लेकर देर शाम तक ट्रैक्टरों की आवाजाही बनी रहती है। लगातार आवाजाही से गांवों की सड़कों की हालत जर्जर हो गई है, जबकि जगह-जगह बालू बिखर जाने से स्थानीय लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है।

ग्रामीणों के अनुसार, प्रतिदिन करीब 400 से अधिक ट्रैक्टर नदी घाटों से बालू भरकर निकलते हैं। प्रत्येक ट्रॉली बालू ₹1800 से ₹2200 तक में बेची जाती है। यहां से उठाया गया बालू बहरागोड़ा, चाकुलिया और बड़शोल मार्ग से होकर जमशेदपुर और पश्चिम बंगाल तक ऊंचे दामों में बेचा जाता है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि बालू माफिया बेखौफ होकर प्रशासन की मिलीभगत में कारोबार चला रहे हैं। चौक-चौराहों पर माफियाओं के लोग तैनात रहते हैं, जो अधिकारियों के वाहन देखने पर तुरंत घाटों को सूचना दे देते हैं। इसके बाद बालू लदे ट्रैक्टर खाली कर भाग खड़े होते हैं।

सड़कों पर दिनदहाड़े दौड़ते ट्रैक्टरों और हाईवाओं के बावजूद, संबंधित विभाग के अधिकारी कार्रवाई से बचते दिख रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार अधिकारी इन वाहनों को देखकर भी अनदेखा कर चले जाते हैं।

हालांकि, बहरागोड़ा प्रशासन ने हाल के महीनों में पश्चिम बंगाल की ओर जा रहे कुछ बालू लदे ट्रकों को जब्त कर कार्रवाई जरूर की थी, लेकिन उसका असर अस्थायी रहा। फिलहाल, अवैध बालू उठाव का सिलसिला बिना किसी रुकावट के जारी है।

ग्रामीणों ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि इस गोरखधंधे पर रोक लगाई जाए ताकि सरकार को हो रहे रोजाना लाखों रुपये के राजस्व नुकसान पर विराम लगाया जा सके।