रांची: झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र में सोमवार को विपक्षी दलों के विधायकों ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए 130वें संविधान संशोधन विधेयक के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। इंडिया गठबंधन के विधायक हाथों में तख्ते और बैनर लेकर सदन के भीतर उतरे और इस विधेयक को लोकतंत्र विरोधी बताते हुए नारेबाजी की।
बहरागोड़ा के विधायक समीर कुमार महंती ने कहा कि —
“केंद्र सरकार द्वारा लाया गया यह 130वां संविधान संशोधन लोकतंत्र की नींव को हिलाने वाला कदम है। यह विधेयक चुनी हुई राज्य सरकारों को गिराने और जनता की आवाज़ को दबाने की सोची-समझी चाल है।”
विपक्ष के विधायकों ने स्पष्ट कहा कि संविधान ने जनता को जो अधिकार दिए हैं, उन्हें छीनने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने केंद्र पर आरोप लगाया कि इस कानून के ज़रिए चुनी हुई सरकारों को अस्थिर करने की कोशिश की जा रही है।
सदन में विपक्ष की ओर से यह भी कहा गया कि —
“देश की जनता ने अपने वोट से सरकारें चुनी हैं, न कि केंद्र की मनमानी से। लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए हमारी लड़ाई पूरी ताक़त से जारी रहेगी।”
पृष्ठभूमि
20 अगस्त 2025 को संसद में पेश किए गए 130वें संविधान संशोधन विधेयक में यह प्रावधान रखा गया है कि यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री किसी गंभीर आपराधिक मामले में 30 दिन से अधिक हिरासत में रहते हैं, तो वे अपने पद से स्वतः अयोग्य हो जाएंगे। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रावधान का इस्तेमाल गैर-भाजपा शासित राज्यों की सरकारों को अस्थिर करने के लिए किया जा सकता है।
विपक्षी गठबंधन ने झारखंड विधानसभा में एक सुर में इसे “काला कानून” करार दिया और इसके खिलाफ सशक्त विरोध दर्ज कराया।