रांची, संवाददाता।
झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र ऐतिहासिक और भावनात्मक पलों के बीच गुरुवार को संपन्न हुआ। अंतिम दिन नेता सदन और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भावुक भाषण देते हुए कहा कि यह सत्र राज्य की राजनीति और इतिहास में हमेशा याद किया जाएगा।
सीएम ने कहा कि यह सत्र कई मायनों में कठिन रहा, क्योंकि 4 अगस्त को दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन के कारण सदन को स्थगित करना पड़ा। उन्होंने कहा कि हमने न सिर्फ एक विधायक और मंत्री को खोया बल्कि उस महान विभूति को भी खोया, जिसने झारखंड को अस्तित्व दिलाने के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया।
शिबू सोरेन को भारत रत्न देने का प्रस्ताव पारित
सत्र के दौरान सर्वसम्मति से शिबू सोरेन को भारत रत्न देने का प्रस्ताव पारित किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरुजी का योगदान केवल झारखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणादायी रहा है।
विपक्ष पर करारा प्रहार
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने भाषण में विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि विपक्ष मुद्दाविहीन होकर सिर्फ शोर मचाता है। सड़क हो या सदन, हर जगह बाधा डालना ही उनकी राजनीति है। जब तर्क खत्म हो जाते हैं तो वे कानून का सहारा लेते हैं और संस्थाओं को हथियार की तरह इस्तेमाल करते हैं।
उन्होंने कहा कि हमारी सरकार जनता की सरकार है और जनता के लिए काम कर रही है। विपक्ष जिन राज्यों में सत्ता में है, वहां की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। वे देश को विश्वगुरु बनाने की बात करते हैं, लेकिन असलियत यह है कि देश की हालत बिगड़ती जा रही है।
केंद्र सरकार पर भी साधा निशाना
सीएम ने केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि झूठे आरोपों में नेताओं को जेल भेजा जा रहा है और ऐसे कानून बनाए जा रहे हैं, जिनसे मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक को जेल भेजने का रास्ता खुल सकता है। यह लोकतंत्र को बंधक बनाने की चाल है।
झारखंड के मुद्दों पर चिंता जताई
सोरेन ने कहा कि झारखंड सोने की चिड़िया कहा जाता है और इसने देश को खनिज-संपदा के रूप में बहुत कुछ दिया है। लेकिन राज्य को बदले में सिर्फ प्रदूषण, बीमारियां और शोषण मिला है। धनबाद, रामगढ़ और यूरेनियम क्षेत्र की स्थिति भयावह है, जहां हर तीसरा व्यक्ति गंभीर बीमारी से जूझ रहा है।
उन्होंने कहा कि बड़ी कंपनियां झारखंड के जंगलों और संसाधनों पर कब्जा जमाने की कोशिश कर रही हैं और राज्य इसकी भारी कीमत चुका रहा है।
विपक्ष को चेतावनी
अपने संबोधन के अंत में हेमंत सोरेन ने विपक्ष से कहा—“आप झारखंड के प्रतिनिधि हैं, दिल्ली-मुंबई के नहीं। राज्य के मुद्दों पर सहयोग कीजिए, न कि झूठे आरोप और षड्यंत्र की राजनीति।”
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री के संबोधन के दौरान विपक्ष का कोई भी सदस्य सदन में मौजूद नहीं था।