रांची: झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने राज्य में चल रहे विशेष सघन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर चुनाव आयोग से कई अहम मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मांगा है। पार्टी का कहना है कि वह मतदाता सूची के अद्यतन कार्य में सहयोग देने के पक्ष में है, लेकिन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है।
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झामुमो के महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र भेजकर सात प्रमुख सवालों पर जवाब मांगा है। पार्टी ने विशेष रूप से उन मतदाताओं को लेकर चिंता जताई है, जिन्हें जीआईएस आधारित हाउस मैपिंग के दौरान “अनमैप्ड” श्रेणी में रखा जाता है। झामुमो ने पूछा है कि ऐसे मामलों में पर्याप्त भौतिक सत्यापन के बिना किसी मतदाता का नाम हटाने या अन्य कार्रवाई करने से रोकने के लिए क्या स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं।
पार्टी ने संथाल परगना, कोल्हान और दक्षिण छोटानागपुर जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में बूथ स्तरीय अधिकारियों (BLO) की नियुक्ति और प्रशिक्षण को भी महत्वपूर्ण मुद्दा बताया है। झामुमो ने जानना चाहा है कि क्या इन क्षेत्रों में स्थानीय भाषाओं, विशेषकर संथाली भाषा की जानकारी रखने वाले कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित की गई है।
इसके अलावा पार्टी ने नए मतदाताओं के पंजीकरण से जुड़े मामलों पर भी सवाल उठाए हैं। झामुमो का कहना है कि अन्य राज्यों में ऐसे उदाहरण सामने आए हैं, जहां पंजीकृत मतदाताओं को बाद में सत्यापन के दौरान “अनमैप्ड” बताकर सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई। ऐसे में झारखंड में अपनाई जा रही व्यवस्था को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाने चाहिए।
झामुमो ने यह भी मांग की है कि राजनीतिक दलों को अनमैप्ड मतदाताओं की सूची, प्रस्तावित विलोपन सूची तथा संबंधित डिजिटल प्लेटफॉर्म तक सीमित पहुंच उपलब्ध कराई जाए, ताकि प्रक्रिया की निगरानी की जा सके।
पार्टी ने चुनाव आयोग से आग्रह किया है कि मतदाता पुनरीक्षण अभियान से संबंधित सभी बिंदुओं पर विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की जाए और उसके सातों सवालों का लिखित जवाब 15 कार्य दिवसों के भीतर उपलब्ध कराया जाए।