चाकुलिया | संवाददाता (रोहन सिंह)
चाकुलिया प्रखंड के बर्डीकानपुर–कालापाथर पंचायत अंतर्गत पश्चिम बंगाल की सीमा से सटा, पहाड़ी और जंगलों से घिरा पोचापानी गांव पिछले एक वर्ष से गंभीर पेयजल संकट का सामना कर रहा है। मुख्यमंत्री जन जल योजना के तहत स्थापित सोलर जलमीनार एक साल से खराब पड़ी है, जिसके कारण ग्रामीणों को मजबूरन खाल (छोटे जलस्रोत) का दूषित पानी पीना पड़ रहा है।
गांव में पानी की समस्या अब स्वास्थ्य संकट का रूप ले रही है। दूषित पानी के सेवन से डायरिया और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों ने बताया कि विभाग की लापरवाही के कारण उनकी परेशानियाँ लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन अब तक किसी अधिकारी ने मौके पर आकर स्थिति की सुध नहीं ली।

गांव के वकील सोरेन, मेघराई मांडी, पृथो मांडी, लसो मांडी, बोका सबर, कुनी सबर, रामचंद सबर, गुरुवारी सबर, धुनू राम मांडी, सरस्वती मांडी, नारायण मांडी, साकरो मांडी, सारो मांडी, सुबल सबर, रूबी सबर, देवा सबर, चंद्र सबर और खेपा सबर ने बताया कि जलमीनार के खराब रहने से टोला के करीब 10 परिवार पेयजल की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि नहाने और कपड़े धोने के लिए उन्हें लगभग एक किलोमीटर दूर स्थित तालाब तक जाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि खाल का पानी पीने योग्य नहीं है, लेकिन मजबूरी में उसी का उपयोग करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और विभाग से सोलर जलमीनार की जल्द मरम्मत कराने की मांग की है ताकि उन्हें स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सके।
इस संबंध में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कनीय अभियंता भागीरथ रवानी ने कहा कि “जलमीनार की मरम्मत का कार्य शीघ्र शुरू किया जाएगा और समस्या का समाधान जल्द से जल्द किया जाएगा।”