पूर्णिया – बिहार के पूर्णिया जिले के टेटगामा गांव में 6-7 जुलाई की रात एक आदिवासी परिवार के पांच सदस्यों को डायन-बिसाही के आरोप में जिंदा जला दिए जाने की विभीषिका ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। इस अमानवीय कृत्य में बाबूलाल उरांव, उनकी पत्नी, मां, बेटा और बहू को पहले बेरहमी से पीटा गया, फिर पेट्रोल डालकर जलाया गया और शवों को खेत में छिपा दिया गया।

इस हृदयविदारक घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए झारखंड कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष बंधु तिर्की ने टेटगामा गांव का दौरा किया और पीड़ित परिवार से मुलाकात की। उन्होंने इसे मानवता पर कलंक करार दिया और कहा कि अंधविश्वास, अशिक्षा और सामाजिक अन्याय ने इस नरसंहार को जन्म दिया है। उन्होंने सरकार से उच्चस्तरीय जांच, दोषियों को कठोर सजा, पीड़ितों को मुआवजा और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और जागरूकता अभियान चलाने की मांग की।
बता दे कि घटना के मुख्य आरोपी नकुल उरांव और दो अन्य को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में कुल 23 नामजद और 150 अज्ञात लोगों पर FIR दर्ज की गई है। बंधु तिर्की ने मृतक परिवार को ₹21,000 की सहायता राशि दी और जिला प्रशासन से त्वरित कार्रवाई का आग्रह किया। उनके साथ कांग्रेस और आदिवासी संगठनों का प्रतिनिधिमंडल भी उपस्थित था।