चाईबासा (झारखंड), 6 अगस्त 2025:
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद राहुल गांधी ने बुधवार को झारखंड के चाईबासा सिविल कोर्ट में विशेष एमपी-एमएलए अदालत के समक्ष अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। विशेष न्यायाधीश सुप्रिया रानी तिग्गा की अदालत ने सुनवाई के दौरान उन्हें सशर्त जमानत प्रदान की, जिसमें ट्रायल के दौरान सहयोग करने की शर्त शामिल है।
राहुल गांधी की ओर से अधिवक्ताओं प्रदीप चंद्रा और दीपांकर रॉय ने पैरवी करते हुए कोर्ट से राहत की मांग की थी। यह मामला वर्ष 2018 में राहुल गांधी द्वारा दिए गए एक कथित आपत्तिजनक बयान से संबंधित है।
क्या है पूरा मामला?
28 मार्च 2018 को कांग्रेस के प्लेनरी सेशन के दौरान राहुल गांधी ने कथित तौर पर भाजपा नेताओं के लिए “हत्यारा” और “झूठा” जैसे शब्दों का प्रयोग किया था। इस बयान के खिलाफ भाजपा नेता प्रताप कुमार ने 9 जुलाई 2018 को चाईबासा सीजेएम कोर्ट में आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर किया था।
प्रारंभिक सुनवाई के बाद मामला फरवरी 2020 में झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश पर रांची स्थित विशेष एमपी-एमएलए अदालत में स्थानांतरित हुआ और बाद में इसे पुनः चाईबासा की विशेष अदालत को सौंपा गया।
राहुल गांधी के खिलाफ जारी हुए वारंट
कोर्ट द्वारा संज्ञान लेने के बाद राहुल गांधी को समन भेजा गया, लेकिन वे निर्धारित तारीखों पर पेश नहीं हुए। इस कारण अदालत ने पहले जमानती, फिर गैर-जमानती वारंट जारी किया।
इसके खिलाफ राहुल गांधी ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसे 20 मार्च 2024 को निस्तारित कर दिया गया। उन्होंने सीआरपीसी की धारा 205 के तहत व्यक्तिगत पेशी से छूट की मांग की, जिसे विशेष अदालत ने खारिज कर दिया। इस आदेश के विरुद्ध दायर पुनः याचिका उन्होंने 10 मार्च 2025 को वापस ले ली।
अंततः कोर्ट में हाजिरी, मिली राहत
हाईकोर्ट द्वारा दिया गया अंतरिम स्थगन आदेश 25 अप्रैल 2024 को समाप्त हो गया था। इसके बाद 22 मई 2025 को चाईबासा कोर्ट ने फिर से गैर-जमानती वारंट जारी किया। इसी आदेश के तहत राहुल गांधी ने बुधवार को अदालत में पेश होकर जमानत ली।
कोर्ट ने उन्हें ट्रायल में नियमित उपस्थिति और सहयोग की शर्त पर जमानत प्रदान की।