चाकुलिया (रोहन कुमार सिंह)
जंगलों में चल रही पाइपलाइन बिछाने की परियोजना ने हाथियों के सुरक्षित आवागमन को संकट में डाल दिया है। स्वर्णरेखा सिंचाई परियोजना के तहत कई संवेदकों द्वारा पाइप बिछाने के लिए बड़े पैमाने पर खुदाई की गई, लेकिन खुदाई के बाद गड्ढों को समतल नहीं किया गया। इन अधूरे कार्यों ने हाथियों की पारंपरिक पगडंडियों को बाधित कर दिया है।
बारिश के मौसम में इन गड्ढों में पानी और कीचड़ भर जाने से कई स्थान दलदल में तब्दील हो गए हैं। इससे हाथियों की सामान्य गतिविधियां बाधित हो रही हैं और वे अब भटक कर गांवों की ओर आ रहे हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति बन रही है।

छह पंचायत सबसे ज्यादा प्रभावित
कालियाम, लोधाशोली, जमुआ, बड़ामारा, कालापाथर और सरडीहा — इन पंचायतों में हाथियों की आम आवाजाही होती रही है। दलमा वन क्षेत्र से पश्चिम बंगाल तक आने-जाने वाले हाथी इन्हीं रास्तों का उपयोग करते हैं। मगर अब रास्तों पर खुदे गड्ढे उनके लिए जानलेवा जाल बनते जा रहे हैं।
वन विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल
स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने वन विभाग पर उदासीनता का आरोप लगाया है। लोगों का कहना है कि संवेदकों ने विभाग से अनुमति लेकर कार्य तो शुरू किया, लेकिन शर्तों का पालन नहीं किया गया। गड्ढों को महीनों से खुला छोड़ दिया गया है, जिससे वन्य जीवों की जान खतरे में पड़ गई है।

वन अधिकारी ने दिया जांच का भरोसा
चाकुलिया रेंज के प्रभारी रेंजर दिग्विजय सिंह ने कहा है कि मामले की जांच की जाएगी और संबंधित संवेदकों को नोटिस भेजा जाएगा। दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों की मांग – जल्द हो सुधार
हाथियों के हमले से त्रस्त ग्रामीणों ने मांग की है कि सभी खुले गड्ढों को तुरंत भरा जाए और पारंपरिक रास्तों को पुनः सुरक्षित बनाया जाए, ताकि इंसानों और जानवरों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।