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दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण, संघर्ष और आदिवासी अस्मिता की राजनीति को मिला सम्मान

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शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान देने की घोषणा की गई है। गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी पद्म पुरस्कारों की सूची में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का नाम शामिल किया गया।

शिबू सोरेन को सिर्फ एक राजनेता नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की आवाज के रूप में जाना जाता था। उन्होंने जल, जंगल और जमीन के मुद्दों को लेकर लंबे समय तक संघर्ष किया। आदिवासी अधिकार, विस्थापन और शोषण के खिलाफ उनका आंदोलन झारखंड की राजनीति का अहम हिस्सा बना।

दिशोम गुरु के राजनीतिक और सामाजिक संघर्ष की शुरुआत एक व्यक्तिगत घटना से हुई थी। उनके पिता सोबरन सोरेन की हत्या महाजनी प्रथा से जुड़े लोगों द्वारा कर दी गई थी। इस घटना ने शिबू सोरेन को भीतर तक झकझोर दिया और उन्होंने आदिवासी समाज के हक की लड़ाई को अपना जीवन उद्देश्य बना लिया।

अलग झारखंड राज्य की मांग को लेकर हुए आंदोलनों में शिबू सोरेन की भूमिका निर्णायक मानी जाती है। उन्होंने गांव-गांव जाकर लोगों को संगठित किया और आदिवासी समाज को राजनीतिक पहचान दिलाने का काम किया। इसी कारण लोग उन्हें सम्मान से ‘दिशोम गुरु’ कहकर पुकारते थे।

शिबू सोरेन तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रहे। इसके अलावा वे केंद्र सरकार में कोयला मंत्री का पद भी संभाल चुके थे। झारखंड की राजनीति में उनका प्रभाव लंबे समय तक बना रहा।

शिबू सोरेन का निधन 4 अगस्त 2025 को लंबी बीमारी के बाद दिल्ली में हुआ था। उनके निधन के बाद पूरे झारखंड में शोक की लहर दौड़ गई थी। वर्तमान में उनके पुत्र हेमंत सोरेन राज्य के मुख्यमंत्री हैं।

झारखंड विधानसभा पहले ही सर्वसम्मति से केंद्र सरकार को शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की अनुशंसा कर चुकी है। राज्य के कई राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का मानना है कि आदिवासी समाज और झारखंड आंदोलन में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से भी सम्मानित किया जाना चाहिए।