जमशेदपुर, संवाददाता।
टाटा स्टील के पूर्व चेयरमैन और संस्थापक परिवार के सदस्य सर दोराबजी टाटा की 166वीं जयंती के अवसर पर सोमवार को बिष्टुपुर स्थित सर दोराबजी टाटा पार्क में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर टाटा स्टील के एमडी टी. वी. नरेंद्र, टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजय कुमार चौधरी, कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट्स और यूनियन के कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। सभी ने सर दोराबजी टाटा की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को याद किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए टाटा स्टील के एमडी टी. वी. नरेंद्र ने कहा कि सर दोराबजी टाटा का संघर्ष भारतीय उद्योग जगत के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उन्होंने बताया कि किस तरह सर दोराबजी टाटा ने देश में स्टील उद्योग की नींव रखी और यहां तक कि अपनी पत्नी के आभूषण तक गिरवी रखकर भारतीय ओलंपिक टीम को विदेश भेजने का साहसिक निर्णय लिया। नरेंद्र ने कहा कि टाटा स्टील ने अपने शुरुआती दिनों से ही संघर्ष का सामना किया है और आज भी ओडिशा के कलिंगानगर प्रोजेक्ट का विस्तार कंपनी के सामने एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी भी उद्योग के विकास से न केवल कंपनी बल्कि शहर और वहां रहने वाले लोगों की भी उन्नति होती है।
गौरतलब है कि सर दोराबजी टाटा का जन्म 27 अगस्त 1859 को हुआ था। वे टाटा समूह के संस्थापक जे. एन. टाटा के बड़े पुत्र थे। इंग्लैंड से शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने अपने करियर की शुरुआत पत्रकारिता से की और बॉम्बे गजट में कार्य किया। इसके बाद उन्होंने टाटा समूह की कमान संभालकर भारत के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके बाद सर एन. बी. सक़लतवाला ने टाटा स्टील के चेयरमैन का पद संभाला।